NAZAR

नजरंदाज उन्हें करू जो नजर के सामने हो,

उनका क्या करू, जो दिल में बस गए है…

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BARISH

नसीब की बारिश कुछ इस तरह से होती रही मुझ पे,

ख्वाहिशे सुखती रही और पलके भीगती रही..

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NAZRON

उनकी नज़रों में फ़र्क़ अब भी नहीं,

पहले मुड़ के देखते थे,और अब देख के मुड़ जाते है

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ZINDAGI

उल्फ़त, मोहब्बत, ग़म, अश्क, बेवफ़ा, अफ़साने…

शायद वो आयी थी जिंदगी में सिर्फ ऊर्दू सिखाने।

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